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जीवन में सबको सबकुछ तो नही मिल जाता।
आते है हजार बीज धरती के आगोश में, पर सबसे अंकुर तो नही निकल आता।
अश्रुपूरित नजरो से देखती हिरनी को देख, हर एक शिकारी का हृदय तो नही पिघल जाता।
घृणा द्वेष की राह की, मंजील तो बर्बादी है, फ़िर भी चलता हर इन्सान, संभल तो नही जाता।
अक्सर निःस्वार्थ प्रेम को, ना लोग समझ पाते है।
हाथ पकरने पर रेत की तरह, उंगलियों की कोरो से निकल जाते है।
फ़िर भी रहता है मौजूद दिल में ये प्यार तो नही बदल जाता।
शायद हममे भी वो बंधन था, जो कण-कण मे चट्टान के।
आज बिखरे रेत है हम, दुनिया के रेगिस्तान के।
बिखर गए तो क्या, इन्सान तो नही बदल जाता।
कहने को बहुत सी बातें है, शायद मै कह जाता।
केवल कहने सुनने से लेकिन, हालात तो नही बदल जाता।
आते है हजार बीज धरती के आगोश में, पर सबसे अंकुर तो नही निकल आता।
अश्रुपूरित नजरो से देखती हिरनी को देख, हर एक शिकारी का हृदय तो नही पिघल जाता।
घृणा द्वेष की राह की, मंजील तो बर्बादी है, फ़िर भी चलता हर इन्सान, संभल तो नही जाता।
अक्सर निःस्वार्थ प्रेम को, ना लोग समझ पाते है।
हाथ पकरने पर रेत की तरह, उंगलियों की कोरो से निकल जाते है।
फ़िर भी रहता है मौजूद दिल में ये प्यार तो नही बदल जाता।
शायद हममे भी वो बंधन था, जो कण-कण मे चट्टान के।
आज बिखरे रेत है हम, दुनिया के रेगिस्तान के।
बिखर गए तो क्या, इन्सान तो नही बदल जाता।
कहने को बहुत सी बातें है, शायद मै कह जाता।
केवल कहने सुनने से लेकिन, हालात तो नही बदल जाता।


2 comments:
dear blogger ,
thanks for making my day a better day , this beautiful poem has a depth of sea and says everything you hav created this blog for " ones contibution to his society"
keep this good work flowing i have felt through ur orkut profile and here also that you area 'JIMMEDAR NAGRIK 'and want to do for society in +ve way please please its my sincere request that don't nip it in bud bring this noble idea to surface and devote some moment of ur hectic day to realise it .... you will always find me there with you ..
urs amod
dear Amod,
thanks for your appreciation...i ll continue with my effort to bring out the talk of my soul...i sincerely invite you to join me..n make this virtual place a happening one...
thanks
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